Sunday, April 18, 2021

Bade Bhai Sahab बड़े भाई साहब Complete Summary Class 10 Sparsh Hindi Chapter 10

Bade Bhai Sahab बड़े भाई साहब  Complete Summary Class 10  Sparsh Hindi Chapter 10



बड़े भाई साहब प्रश्न अभ्यास

(क ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25 -30 ) शब्दों में दीजिए -:

प्रश्न 1 -: छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम - टेबल बनाते समय क्या क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया ?

उत्तर  -: छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम - टेबल बनाते समय सोचा कि वह मन लगाकर पढ़ाई करेगा और बड़े भाई को कभी शिकायत का मौका नहीं देगा। सुबह छः से रात ग्यारह बजे तक सभी विषयों को पढ़ने का कार्यक्रम रखा गया। परन्तु पढ़ाई करते समय खेल के मैदान,वॉलीबॉल की तेजी, कबड्डी और गुल्ली -डंडे का खेल उसे अपनी ओर खींचते थे इसीलिए वह टाइम टेबल का पालन नहीं कर पाया।

प्रश्न 2 -: एक दिन जब गुल्ली -डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुंचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई ?

उत्तर  -: एक दिन जब गुल्ली -डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुंचा तो उनकी प्रतिक्रिया बहुत भयानक थी। वह बहुत गुस्से में थे। उन्होंने छोटे भाई को डांटते हुए कहा कि प्रथम दर्जे में पास होने का उसे घमण्ड हो गया है और घमण्ड के कारण रावण जैसे भूमण्डल के स्वामी का भी नाश हो गया था तो हम तो फिर भी साधारण इंसान हैं। बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को गुल्ली - डंडा खेलने के बजाये पढ़ाई में ध्यान देने की नसीहत दी।

प्रश्न 3 -: बड़े भाई साहब को अपने मन की बात क्यों दबानी पड़ती थी ?

उत्तर  -: बड़े भाई साहब और छोटे भाई की उम्र में पांच साल का अंतर था। वे माता पिता से दूर हॉस्टल में रहते थे। बड़े भाई साहब का भी मन खेलने ,पतंग उड़ाने और तमाशे देखने का करता था परन्तु वे सोचते थे की अगर वो बड़े होकर मनमानी करेंगे तो छोटे भाई को गलत रास्ते पर जाने से कैसे रोकेंगे। बड़े भाई साहब छोटे भाई का ध्यान रखना अपना कर्तव्य मानते थे इसीलिए उन्हें अपनी इच्छाए दबनी पड़ती थी।

प्रश्न 4 -: बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों ?

उत्तर  -: बड़े भाई साहब चाहते थे कि छोटा भाई खेल - कूद में ज्यादा ध्यान न देकर पढ़ाई में ध्यान दे। वे छोटे भाई को हमेशा सलाह देते थे कि अंग्रेजी में ज्यादा ध्यान दो ,अंग्रेजी पढ़ना हर किसी के बस की बात नहीं है। अगर पढ़ाई में ध्यान नहीं दोगे तो उसी कक्षा में रह जाओगे। इसलिए बड़े भाई साहब छोटे को खेलकूद से ध्यान हटाने की सलाह देते थे।

प्रश्न 5 -: छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फायदा उठाया ?

उत्तर  -: छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का अनुचित लाभ उठाया। उसपर बड़े भाई का डर कम हो गया। भाई के डर से जो थोड़ी बहुत पढाई करता था वह भी बंद कर दी थी क्योंकि छोटे भाई को लगता था कि वह पढ़े या ना पढ़े पास हो ही जायेगा। वह अपना सारा समय मौज मस्ती और खेल के मैदान में बिताने लगा था।

(ख )निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50 -60 ) शब्दों में लिखिए -:

प्रश्न 1 -: बड़े भाई की डाँट फटकार अगर ना मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता ?अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर  -: बड़े भाई  साहब को अपनी जिम्मेदारिओं का आभास था वे जानते थे कि अगर वह अनुशासन हीनता करेंगे तो छोटे भाई को गलत रास्ते पर जाने से नहीं रोक पाएंगे। छोटा भाई जब भी खेल कूद में ज्यादा समय लगाता तो बड़े भाई साहब उसे डाँट लगाते और पढ़ाई में ध्यान लगाने को कहते। यह बड़े भाई का ही डर था कि छोटा भाई थोड़ा बहुत पढ़ लेता था। अगर बड़े भाई साहब छोटे भाई को डाँट फटकार नहीं लगते तो छोटा भाई कभी कक्षा में अव्वल नहीं आता।

प्रश्न 2 -: बड़े भाई साहब पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचारो से सहमत है ?

उत्तर  -: बड़े भाई साहब पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के तौर तरीकों पर व्यंग्य करते हुए कहा है कि ये शिक्षा अंग्रेजी बोलने ,पढ़ने पर जोर देती है चाहे किसी को अंग्रेजी पढ़ने में रूचि है या नहीं। अपने देश के इतिहास के साथ साथ दूसरे देशों के इतिहास को भी पढ़ना पढ़ता है जो बिलकुल भी जरुरी नहीं है। यहाँ पर रटने वाली प्रणाली पर जोर दिया जाता है। बच्चों को कोई विषय समझ में आये या ना आये रट कर परीक्षा में पास हो ही जाते हैं। छोटे -छोटे विषयों पर लम्बे -लम्बे निबंध लिखने होते हैं। ऐसी शिक्षा प्रणाली जो  लाभदायक कम और बोझ ज्यादा लगे ठीक नहीं है।

प्रश्न 3 -: बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है ?

उत्तर  -: बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ केवल किताबी ज्ञान से नहीं आती। बल्कि जीवन के अनुभवों से आती है। इसके लिए उन्होंने अपनी अम्मा ,दादा और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण भी दिए है। उनका कहना है कि हम इतने पढ़े होने के बाद भी अगर बीमार भी पड़ जाते है तो परेशान हो जाते हैं लेकिन हमारे माँ दादा बिना पढ़े भी हर मुसीबत का सामना बड़ी आसानी से करते है इसमें  केवल इतना ही फर्क है कि उनके पास हमसे ज्यादा जीवन का अनुभव है। बड़े भाई के अनुसार अनुभव ही समझ दिलाता है।

प्रश्न 4 -: छोटे भाई के मन में बड़े भाई के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई ?

उत्तर -: एक दिन शाम के समय ,हॉस्टल से दूर जब छोटा भाई  एक पतंग को पकड़ने के लिए बिना किसी की परवाह किये दौड़ा जा रहा था, अचानक भाई साहब से उसका आमना -सामना हुआ।उन्होंने बाजार में ही उसका  हाथ पकड़ लिया और बड़े क्रोधित भाव से बोले ‘लेखक भले ही बहुत प्रतिभावान है ,इसमें कोई शक नहीं हैं ,लेकिन जो प्रतिभा किसी को शर्म लिहाज़ न सिखाये वो किस काम की।बड़े भाई साहब कहते हैं कि लेखक भले ही अपने मन में सोचता होगा कि वह उनसे सिर्फ एक ही कक्षा पीछे रह गया है और अब उन्हें लेखक को डाँटने या कुछ कहने का कोई हक नहीं है ,लेकिन ये सोचना लेखक की गलती है।बड़े भाई साहब उससे पांच साल बड़े हैं और हमेशा ही रहेंगे । समझ किताबें पढ़ लेने से नहीं आती ,बल्कि दुनिया देखने से आती है।बड़े भाई साहब लेखक को कहते हैं कि यह घमंड जो उसने दिल में पाल रखा है कि वह बिना पड़े भी पास हो सकता है और भाई साहब को उसे डाँटने और समझने का कोई अधिकार नहीं रहा ,इसे निकल डाले। बड़े भाई साहब के रहते लेखक कभी गलत रस्ते पर नहीं जा सकता।बड़े भाई साहब लेखक से कहते हैं कि अगर लेखक नहीं मानेगा तो भाई साहब थप्पड़ का प्रयोग भी कर सकते हैं और बड़े भाई साहब लेखक को कहते हैं कि उसको उनकी बात अच्छी नहीं लग रही होगी।छोटा भाई , भाई साहब की इस समझने की नई योजना के कारण उनके सामने सर झुका कर खड़ा था। आज उसे सचमुच अपने छोटे होने का एहसास हो रहा था न केवल उम्र से बल्कि मन से भी और भाई साहब के लिए उसके  मन में इज़्ज़त और भी बड़ गई।


प्रश्न 5 -: बड़े भाई साहब की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।

उत्तर -: बड़े भाई साहब अध्ययनशील थे। हमेशा किताबे खोल कर बैठे रहते थे। दिन रात कठिन परिश्रम करते थे। चाहे उन्हें समझ में आये या ना आये, वे फिर भी एक -एक अक्षर को रट लिया करते थे। अपने बड़े होने का उन्हें एहसास है ,इसलिए वे छोटे भाई को तरह तरह से समझते हैं। अपने कर्तव्य के लिए वे अपनी बहुत सी इच्छाओं को दबा देते थे। छोटे भाई को किताबी ज्ञान से हट कर अनुभव के महत्त्व को समझते थे और कहते थे की उनके रहते वह कभी गलत रास्ते पर नहीं चल पायेगा।

प्रश्न 6 -: बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्पूर्ण कहा है ?

उत्तर -: बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से जिंदगी के अनुभव को महत्पूर्ण कहा है। उन्होंने पाठ में कई उदाहरणों से ये स्पष्ट किया है। अम्मा और दादा का उदाहरण और हेडमास्टर का उदाहरण दे कर बड़े भाई साहब कहते है कि चाहे कितनी भी बड़ी डिग्री क्यों न हो जिंदगी के अनुभव के आगे बेकार है। जिंदगी की कठिन परिस्थितियों का सामना अनुभव के आधार पर सरलता से किया जा सकता है।

प्रश्न 7 -: बताइये पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि -:

(क ) छोटा भाई बड़े भाई का आदर करता था।

उत्तर -: छोटे भाई को पतंगबाज़ी का नया शौक हो गया था और अब उसका सारा समय पतंगबाज़ी में ही गुजरता था। फिर भी वह भाई साहब की इज्जत करता था और उनकी नजरों से छिप कर ही पतंग उडाता था। मांझा देना ,कन्ने बाँधना ,पतंग टूर्नामेंट की तैयारियाँ ये सब काम भाई साहब से छुप कर किया जाता था।

(ख ) भाई साहब को जिंदगी का अच्छा अनुभव है।

उत्तर -: भाई साहब का अपने कर्तव्यों के लिए अपनी इच्छाओं को दबाना ,छोटे भाई को जीवन के अनुभव पर उदाहरण देना ये सब दर्शाता है कि भाई साहब को जिंदगी का अच्छा अनुभव है।

(ग ) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है।

उत्तर -: जब भाई साहब ने कटी पतंग देखी तो लम्बे होने की वजह से  उन्होंने उछाल कर डोर पकड़ ली और बिना सोचे समझे हॉस्टल की और दौड़े ,ये दर्शाता है की भाई साहब के अंदर भी एक बच्चा है।

(घ ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।

उत्तर -: भाई साहब हर समय छोटे भाई को पढ़ने के लिए कहते हैं ,समय व्यर्थ करने पर डाँटते है और चाहते है की वह कभी गलत रास्ते पर ना जाये।


 

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